Friday, December 1, 2023

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ये है इसरो का सबसे Secret हथियार जिसे अमेरिका चाहता है ISRO DRDO India Amazing weapon today update

ये है इसरो का सबसे Secret हथियार जिसे अमेरिका चाहता है ISRO DRDO India Amazing weapon today update

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ये है इसरो का सबसे Secret हथियार जिसे अमेरिका चाहता है ISRO DRDO India Amazing weapon today update

दोस्तों भारत का इसरो और डीआरडीओ एक के बाद एक नया धमाका कर रहे हैं भारत का डीआरडीओ शेर तो है ही लेकिन अब हमारा इस रोज़ सवा शेर बन चुका है इस समय जहाँ डीआरडीओ हाइपरसोनिक मिसाइल, लड़ाकू विमान और डिफेन्स सिस्टम को बनाकर दुनिया को चौंका रहा है, आज हमारा भारत ऐसा देश है जो हवा, जमीन और समुद्र से परमाणु हमला तो कर ही सकता है साथ ही उनके परमाणु हमले को भी रोक सकता है डीआरडीओ पासी पीढ़ी के लड़ाकू विमान एएमसीए पर भी काफी तेजी से काम कर रहा है
लेकिन भारत की स्पेस एजेंसी इसरो के चंद्रयान तरीके, सफल मिशन और आदित्य एल वन की सफल लॉन्चिंग के बाद अब कुछ ऐसा कारनामा करने जा रही है ऐसी तकनीक को बनाने जा रही है जो सिर्फ और सिर्फ भारत के पास ही होने वाला ये हथियार क्या है, इसकी ताकत क्या है और ये हमारे भारत के किस काम आएगा जानेगे आज के इस वीडियो में तो विडिओ के अंत तक बने रहें दोस्तों दरअसल इसरो द्वारा बनाई जा रही है तकनीक एक ऐसा इंजन है जो स्पेस में बिजली की रफ्तार से उड़ते हुए मिसाइल को लॉन्च कर सकेगी
चुटकीयो में स्पेस सैटेलाइट को लॉन्च कर सकेगा और जरूरत पड़ने पर दुश्मन के सैटेलाइट, ड्रोन, एनर्जी वेपन और लड़ाकू विमानों को भी तबाह करने में सक्षम होगा ये ऐसे मिसाइल को फाइर कर सकता है जिसकी स्पीड आवाज की गति से भी दस गुना से ज्यादा होगी ये कोई फाइटर जेट या फिर ड्रोन जैसी चीज़ नहीं होगी बल्कि ये भारत का एक स्पेस प्लैन होगा जो हमारे धरती के वायुमंडल तक ही नहीं बल्कि अंतरिक्ष तक जाने में सक्षम होगा या स्पेस में सफर कर सकेगा और स्पेस में ही सैटेलाइट को भी लॉन्च कर सकेगा
साथ ही हमारे दुश्मन पर भी हाइपरसोनिक मिसाइल से हमला कर पाएगा ऐसे दुश्मन का डिफेन्स सिस्टम भी ट्रैक नहीं कर पायेगा ये है इसरो का सबसे खास प्रोजेक्ट है टी एसटी ओ प्लेन
टी एस टी ओ मतलब टू ऑर्बिटर प्लेन भारत इसकी मदद से जासूसी या फिर हमला भी कर सकता है साथ ही ये दुश्मन के सैटेलाइट को तबाह भी कर सकता है नए भारत का यह नया हथियार स्पेस प्लेन ही नहीं बल्कि एक घातक हथियार भी होने वाला है, जो मिनटों में ही युद्ध का पूरा का पूरा नक्शा बदल कर रख सकता है
हालांकि दोस्तों, इसरो ने अभी तक इसकी तकनीकों को सीक्रेट ही रखा है क्योंकि इसरो का काम स्पेस में एक्स्परीमेंट करना है जबकि डिफेन्स के लिए भारत का डीआरडीओ है लेकिन इसरो का ये स्पेस प्लेन भारत के दुश्मनों के लिए सिर्फ काल ही साबित नहीं हो बल्कि ये स्पेस में हो रहे हैं हमारे खर्च को भी काफी कम कर देगा ये एक ऐसा पावरफुल और ऐडवान्स प्लेन होगा जो ना सिर्फ पृथ्वी के वातावरण में गोते लगाएगा बल्कि ये स्पेस में भी कई दिनों तक रहकर धरती में वापस आने के समता रखेगा इस समय दुनिया के सभी देश सेटेलाइट लॉन्च करने के लिए रॉकेट का इस्तेमाल करते हैं
इस मामले में नासा और रोस्कोस्मोस ने स्पेस शटल का भी इस्तेमाल किया लेकिन अब हमारे इसरो ने इससे भी आगे सोचा है और इसरो की ये तकनीक सबके होश उड़ाने वाली है, क्योंकि भारत इसका इस्तेमाल मिलिटरी सेक्टर में भी कर सकता है लेकिन अब सवाल यह है कि भारत को इसकी जरूरत ही क्यों पड़ी तो आपको बता दें कि इसरो ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए साल दो हज़ार तीस का टारगेट सेट किया हुआ उस समय पहले हमने रीयूजेबल स्पेस लॉन्च वेहिकल भी सफल परीक्षण किया ये प्रोजेक्ट भी उसी प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है
ये एक सौ देशी स्पेस सेटल है, जिसे इसरो के वैज्ञानिक को ने कम खर्चे में इसे लॉन्च वेहिकल को तैयार किया है, जिसे वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर की मदद से जमीन से करीब चार किलोमीटर ऊपर ले जाया गया और वहाँ से इसे छोड़ दिया गया था फिर ये रियूजेबल लॉन्च वेहिकल अपने आप ही सतह पर आकर लैन्ड हो गया था ऐसे यानों के जरिए दुश्मन के सैटेलाइट को तबाह किया जा सकता है और ऐसे यानों पर लेज़र वेपन को लगाकर भी चलाया जा सकता है
भारत दुश्मन के इलाके में जासूसी का काम इस यान के जरिए कर सकता है जब डीएसटीओ प्लेन बनकर तैयार होगा तो इसमें पायलट भी बैठकर उड़ान भर सकेंगे, जो इस फाइटर जेट को एक प्लेन की तरह उड़ायेंगे इसमें रॉकेट के साथ ही टर्बोजेट से लेकर स्क्रैमजेट इंजन तक लगाया जाएगा ये प्लेन जब जमीन से पंद्रह किलोमीटर की उचाई पर पहुंचेगा तब ये टर्बोजेट इंजन फ्यूल बंद कर देगा पंद्रह किलोमीटर के बाद इस का स्क्रैमजेट इंजिन शुरू हो जाएगा जब पच्चीस किलोमीटर की उचाई पर इसको लेकर जाएगा
उसके बाद इसका स्क्रैमजेट इंजन भी वही पर बंद हो जाएगा, जिसकी रफ्तार को और भी ज्यादा बूस्ट कर देगा ये विमान स्पीड को आसानी से हासिल कर सकता है इसके बाद इसके रॉकेट इंजन को स्टार्ट करने के बाद ये तीन सौ किलोमीटर वाले लो अर्थ ऑर्बिट में अपने साथ रखें पेलोड को रिलीज कर देगा यानी स्पेस में सैटेलाइट या फिर किसी भी तरह के हथियार को लॉन्च किया जा सकेगा ये धरती के निकले ऑर्बिट में दस हज़ार किलोग्राम से ज्यादा का वजन ले जाने में सक्षम होगा यानी आप ये अंदाजा लगा सकते हैं
क्या स्पेस से हाइपरसोनिक रफ्तार वाली मिसाइल को इस यान से युद्ध के समय हमला किया जा सकता है हालांकि इसके लिए मिलिटरी यूज़ वाला मामला इसरो ने दुनिया के सामने नहीं रखा, लेकिन दुश्मनों के खिलाफ़ युद्ध लड़ने के लिए भारत ने अपनी पूरी कमर कस रखी है क्योंकि चीन ने भारत के सैटेलाइट कम्यूनिकेशन पर बारह से लेकर दो हज़ार अठारह तक कई बार साइबर अटैक की इसलिए भारत में भी अपने ऐंटी सैटलाइट मिसाइल को भी लांच किया है
साथ ही हमारा भारत इस समय ग्राउंड एअर और रेडियो फ्रिक्वेन्सी जैमर तकनीक से भी लैस हो गया है, जो स्पेस डिवाइस और डेटा ट्रांसमिशन के कंट्रोल में अपलिंक डाउनलोडिंग और क्रॉसलिंकिंग को अपना निशाना बना सकती है

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