Friday, December 1, 2023

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Chandrayaan 3 Soft Landing चंद्रयान 3 का रोमांचक सफर Rover Pragyan India on moon

Chandrayaan 3 Soft Landing चंद्रयान 3 का रोमांचक सफर Rover Pragyan India on moon

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Chandrayaan 3 Soft Landing चंद्रयान 3 का रोमांचक सफर Rover Pragyan India on moon

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जानने के लिए कुर्सी की पेटी बाद लीजिये चलिए हमारे साथ विक्रम लैंडर की लैंडिंग के रोमांचक सफर पर दोस्तों तेईस अगस्त के दिन पूरे भारत में टेंशन का माहौल छाया हुआ था और जैसे जैसे शाम करीब आ रही थी हम सभी की धड़कनें तेज होती जा रही थी, क्योंकि इसी शाम चंद्रयान तीन की लैंडिंग होने वाली थी इसरो के वैज्ञानिक को की कठिन परीक्षा होने वाली थी और यही शाम भारत की किस्मत लिखने वाली थी इसलिए शाम के पांच बजकर बीस मिनट पर जब इसरो ने चंद्रयान तीन की लैंडिंग का लाइव टेलीकॉस्ट शुरू किया तो एक सौ चालीस करोड़ भारतीय अपने मोबाइल और टीवी स्क्रीन के सामने
नज़रें गड़ाए बैठ गए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी साउथ अफ्रीका से इस रोग के साथ लिव जुड़ गए थे और सभी उस पल का इंतजार कर रहे थे जब विक्रम लैंडर की लैंडिंग शुरू होने वाली थी इंतज़ार के इन घड़ियों में हर एक पल एक घंटे के जैसा मालूम पड़ रहा था लेकिन आखिरी में वो पल आ ही गया जब विक्रम लैंडर की लैंडिंग शुरू होने वाली थी जिसे देखने के लिए सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लोग उत्सुक थे और इस मिशन को लाइव देखने से भारत के दुश्मन देश यानी चीन और पाकिस्तान भी खुद को नहीं रोक पाए थे तो आखिर क्या हुआ आखिरी के उस बीस मिनटों में
जिसके बाद चंद्रयान तीन ने इतिहास रच दिया जानने के लिए चलिए चलते हैं विक्रम के साथ मून लैंडिंग के इस रोमांचक सफर पर तो शाम के करीब पांच बजकर चवालीस मिनट पर चंद्रयान तीन अपनी कक्षा में लैन्डिंग की तैयारी करते हुए छे हज़ार अड़तालीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दहाड़ते हुए आगे बढ़ रहा था तभी इसरो के मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स में बैठे चीफ ऐट सोमनाथ ने आखिरी बटन दबाया और इसके ए एल एस यानी ऑटोमैटिक लैन्डिंग सिक्वेन्स को ऐक्टिवेट कर दिया यानी कि अब विक्रम लैंडर अपने आप खुद को कंट्रोल करने वाला था और इसरो के वैज्ञानिक कर बस इस खूबसूरत नजारे को
जी हारने वाले थे तो इस कमांड के बाद विक्रम लैंडर ने तुरंत अपना कमाल दिखाना शुरू किया और अपनी और फिर छोड़ते हुए चाँद की तरफ बढ़ने के पहले चरण की ओर निकल पड़ा रफ ब्रेकिंग फेस दोस्तों लैन्डिंग केस पहले पड़ाव में विक्रम लैंडर ने तीस किलोमीटर की उचाई से चाँद की सतह की तरह पढ़ना शुरू किया और धीरे धीरे गोल चक्कर लगाते हुए ये नीचे उतरने लगा इस दौरान शुरुआत में इसकी रफ्तार छे हज़ार किलोमीटर प्रति घंटा थी, लेकिन इसके अपने चारों जिनको ऑन करके विपरीत दिशा में दबाव देने से धीरे धीरे रफ्तार कम होने लगी करीब ग्यारह मिनट तीस सेकंड के बाद इस अपनी रफ्तार को तेरह सौ किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया था
और ये सिर्फ और सिर्फ सात दशमलव चार किलोमीटर उचाई तक पहुँच चुका था इसके साथ रह ब्रेकिंग फ्री ऐटिट्यूड अपने लैन्डिंग मिशन के इस पड़ाव में चंद्रयान तीन के विक्रम लैंडर ने दो महत्वपूर्ण काम किये, जिसमें से पहला था लैन्डिंग में सहायक कारा और लासा सेन्सर्स को ऑन करना और दूसरा था चाँद की सतह से अपनी उचाई को कम करते हुए छे दशमलव आठ किलोमीटर तक लाना ये दोनों काम करने में इसे महज
दस सेकंड का समय लगा फाइन ब्रेकिंग फील्ड दोस्तों लैन्डिंग का ये तीसरा बड़ा और चंद्रयान तीन की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि इसी चरण में पिछली बार चंद्रयान दो का विक्रम लैंडर डगमगाया था और चाँद की सतह पर गिरकर तबाह हो चुका था ऐसे में इसरो के इस मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स में कौतूहल का माहौल बना हुआ था और मन में चल रही दुविधा के साथ अगले तीन मिनट निकालना वैग्यानिकों के लिए काफी कठिन था
इसलिए लाइव टेलिकास्ट में भी सन्नाटा छाया हुआ था लेकिन आपको यह जानकर खुशी होगी कि चंद्रयान तीन ने इस पड़ाव को चुटकियों में पार किया जहाँ इस पड़ाव में चंद्रयान तीन के विक्रम ने ना सिर्फ से वर्टिकल किया
चलो सात किलोमीटर से आठ सौ मीटर तक कर दिया और इस पड़ाव के अंत में विक्रम लैंडर की वेलोसिटी यानी रफ्तार ज़ीरो हो चुकी थी मानो ऐसे की वो चाँद की सतह के ऊपर बाहुबली की तरह सीना ताने स्थिर खड़ा हो इस तरह तीन मिनट में फाइन ब्रेकिंग फेज पूरा हुआ और अगले बीस से बाईस सेकंड ज़ इसी स्थिती में खड़े रहने के बाद से चाँद की तरफ जाने के लिए अपना आखिरी पड़ाव में एंट्री ले ली वर्टिकल
आठ सौ मीटर की उचाई पर शुरू हुआ ये पड़ाव अब चाँद की सतह को छूकर विजय पाने पर पूरा होने वाला था, जिसके लिए पूरे भारत में उत्सुकता का माहौल बना हुआ था हर तरफ चंद्रयान तीन की सफलता के लिए प्रार्थना की जा रही थी मिशन के इसी चरण में विक्रम लैंडर धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए एक सौ पचास मीटर की उचाई पर पहुंचा और इसे अपने चार में से दो इंजिन बंद कर दिए इस दौरान इसकी रफ्तार फिर से शून्य हो चुकी थी और ये फिर से बाईस सेकंड के लिए जान के पतले वातावरण में
डू वर्क करने लगा यानी तैरने लगा इसी बीच इसके अंदर लगे ग्यारह कैमराज और नाइन सेन्सस लैंडिंग के लिए सही स्पॉट ढूँढ रहे थे और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि चंद्रयान तीन के ऑटोमैटिक लैन्डिंग सिक्वेन्स ऐल्गोरिद्म और इसके सभी उपकरण में साथ मिलकर रीयल टाइम डेटा स्टडी करके सिर्फ बीस सेकंड में निर्णय ले लिया और अगले बीस सेकंड में जैसे ही हमने पलकें झपक आई तो विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह पर सीना ताने खड़ा था इस ऐतिहासिक जीत से जिससे पूरा भारत तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठ

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